Tuesday, 3 July 2018

राष्ट्रीय कवि संगम, भागलपुर इकाई द्वारा भागलपुर में 1.7.2018 को अखिल भारतीय युवा कवि सम्मेलन सम्पन्न

युवा कवि-कवयित्रियों ने बहाई देशभक्ति और प्रेम की बयार



राष्ट्रीय कवि संगम की भागलपुर इकाई द्वारा भागलपुर के सराय स्थित आरम्भ भारत संस्थान के प्रशाल में अखिल भारतीय युवा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया । विपरीत मौसम के बावजूद भी झमाझम बारिश में सैकड़ों श्रोता कार्यक्रम का लुफ्त उठाने के लिए उपस्थित हुए जो देर संध्या तक बने रहे, सम्मेलन में भागलपुर के अलावा पटना, जहानाबाद, गया, नालन्दा, बिहारशरीफ, मुजफ्फरपुर, सहरसा, खगड़िया, मुंगेर आदि जिलों से आए 3 दर्जन से अधिक युवा कवियों और कवयित्रियों का कार्यक्रम के संयोजक नीरज कुमार सिन्हा ने फूलों एवं अंगवस्त्रों से स्वागत किया । समारोह का उद्घाटन एवं अध्यक्षता वरीय हिंदी प्राध्यापक प्रोफेसर (डॉक्टर) छेदी सह ने की वहीं तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलगितकार 'विद्यावाचस्पति' आमोद कुमार मिश्र मुख्य अतिथि थे, साथ हीं राष्ट्रीय कवि संगम के प्रदेश संयोजक अविनाश कुमार पांडे, जहानाबाद और मुंगेर से आए युवा गजलकार सागर आनंद,  विकास कुमार एवं कवयित्री माधवी चौधरी मंचासीन थे।

इसके बाद कवियों और कवयित्रयों नें अलग - अलग अंदाज में अपनी-अपनी प्रस्तुति दी जिसमें जहानाबाद और मुंगेर से आये युवा गजलकार सागर आनंद, विकास कुमार औऱ मनजीत सिंह 'किनवार' नें अपनी ग़ज़ल से लोगों को प्रेम और श्रृंगार रस में डुबो दिया । वहीं खगड़िया से आयी कवियत्री स्वरक्षी स्वरा और माधवी चौधरी ने अपनी कविताओं का रोचक और भावपूर्ण तरीके से पाठ कर माहौल को रसमय बना दिया । नालंदा से आये ओज कवि मनीष कुमार रंजन और पटना से वीर रस के कवि केशव कौशिक, कुश सिंह आजाद, कुंदन आनंद ने इस सम्मेलन में जहां देशभक्ति गीतों की बयार बहायी वहीं युवाओं में देश प्रेम का संचार एवं नारी सशक्तिकरण की बात भी जोर शोर से की । साथ हीं मुजफ्फरपुर से पधारे हास्य व्यंग के कवि अमीर हमजा ने अपनी प्रस्तुति से लोगों को हंसा-हंसा कर माहौल को खुशनुमा बना दिया । बिहारशरीफ, गया, सहरसा से आए नवनीत कृष्णा, कुमार आर्यन, अमृतेश मिश्रा और मनीष कुमार ने अपने शायरी और गीतों के द्वारा श्रोताओं का काफी उत्साह वर्धन किया और तालियों के द्वारा समर्थन प्राप्त किया। पटना के संस्कृत कवि अविनाश पांडे नें संस्कृत में कविताएं एवं गाना सुना कर युवाओं को एक नया संदेश दिया कि संस्कृत में भी अच्छे से अच्छे गाने को गाया जा सकता है । साथ हीं स्थानीय दो  दर्जन से अधिक युवा कवियों और कवयित्रियों की उत्साहपूर्ण एवं धमाकेदार प्रस्तुति की वजह से कार्यक्रम देर संध्या तक चला । सभी कवियों और कवित्रीयों को अंत में कार्यक्रम अध्यक्ष प्रोफेसर डॉक्टर छेदी साह, मुख्य अतिथि अमोद कुमार मिश्र, प्रदेश संयोजक अविनाश कुमार पांडे, औऱ महासचिव नीरज कुमार सिन्हा के द्वारा संयुक्त रुप से "श्रेष्ठावदान पत्र" प्रदान किया गया।

इस मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार चंद्रप्रकाश जगप्रिय द्वारा रचित पुस्तक 'खगड़िया जिले का इतिहास' का मंचासीन अतिथियों द्वारा लोकार्पण किया गया। मंच संचालन मनजीत सिंह 'किनवार' एवं नवनीत कृष्णा ने शेरो-शायरी के बीच बारी-बारी से किया। इस मौके पर कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें नीरज कुमार सिन्हा को महासचिव, अनिमेष कुमार को सचिव, मनजीत सिंह 'किनवार' को उपाध्यक्ष, अमित कुमार को कोषाध्यक्ष, तथा आलोक प्रेमी को मीडिया प्रभारी बनाया गया । इस मौके पर धन्यवाद ज्ञापन करते हुए संस्था के महासचिव नीरज कुमार सिन्हा ने संस्था के उद्देश्यों की चर्चा करते हुए कहा, यह संस्था भारतवर्ष के विभिन्न जिलों में कार्यकारिणी गठन कर उसके माध्यम से उस क्षेत्र में भ्रमण कर युवा प्रतिभाओं को तलाश रही है, और उन्हें तलाश कर राष्ट्रीय स्तर पर एक श्रेष्ठ कवि के रूप में मंच प्रदान कर रही है, संस्था हर वर्ष 15 नवंबर को "दस्तक नई पीढ़ी" नाम से कार्यक्रम का आयोजन करती है, जिसमें पूरे देश से 10 युवा कवियों का चयन किया जाता है । उदहारण स्वरूप -  पंकज झा, सुन्दर कटारिया, सर्वेश मिश्रा, सुमित ओरछा, दिनेश देवघरिया................ आदि जैसे बहुत से राष्ट्रीय स्तर के कवि इसी मंच से हैं। जिसकी शुरुआत अब भागलपुर की धरती से भी हो गया है ।
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आलेख- नीरज कुमार सिन्हा







Tuesday, 12 June 2018

राष्ट्रीय कवि संगम का कवि सम्मलेन 11.6.2018 को रसूलपुर जिलानी, मुजफ्फरपुर में संपन्न

...तभी तो सच को सच कहने से मुकर गया



'राष्ट्रीय कवि संगम'के बैनर तले दिनांक 11 जून 2018 को रसूलपुर ज़िलानी (मुजफ्फरपुर) स्थित गुरूवर संगीत महाविद्यालय में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें कई नये कवियों ने अपनी रचनायें प्रस्तुत की। इसकी अध्यक्षता करते हुए डॉ कुमार विरल ने कहा कि कविता को नये कवियों से जोड़ना होगा। हमारे देश में नवोदित कवियों की आवश्यकता है।
 उन्होंने हिंदी व भोजपुरी में कई कवितायें प्रस्तुत की-
तोहरो हमार चर्चा सब के जुबान पर
सांचों ई जिंदगी एगो अखबार हो गइल.

इसके बाद पटना से आये युवा कवि कन्हैया परमहंस ने अपनी रचना सुनाई -
खुद से खुद को नाज करने दो
एक दो अपने भी नाज रहने दो

इसके उपरांत  युवा शायर हुसैन सलीम ने अपनी ग़ज़ल पेश की जो कुछ यूं थी- 
लगता है वह भी उस ज़ालिम से डर गया
तभी तो सच को सच कहने से मुकर गया

युवा कवि सुमन वृक्ष ने अपनी कविता का पाठ किया जिसकी पंक्तियाँ थीं -
हमें जिंदगी भी मौत से प्यारी है
क्योंकि एक दिन मौत सबको आनी है

मंच संचालन 'अमीर हमज़ा' ने किया। इन्होंने बीच बीच मे हास्य रस्य की कविता सुना कर लोगों को गुदगुदाते रहे। इस अवसर पर कई गण्यमान्य लोग उपस्थित थे। इस अवसर पर डॉ संजय संजू, एम एस हुसैन, अमर सिंह राणा, दीपक टंडेल, सुनील कुमार आदि उपस्थित थे।
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आलेख - अमीर हमजा


 

  





Thursday, 7 June 2018

ज्ञान और अनुभव - कैंची के दो सिरे / संजीव गुप्ता

लघु निबन्ध - संजीव गुप्ता 



अक्षर ज्ञान से शुरू होकर प्रेक्षणों से गुजरता हुआ जब मनुष्य आत्मज्ञान की प्राप्ति की ओर बढ़ जाता है तो इस यात्रा की पूर्णता को ही ज्ञान की प्राप्ति कहा जाता है. अक्षर ज्ञान हमें यह बताता है कि हमसे पहले की पीढ़ियों ने क्या ज्ञान प्राप्त कर पुस्तकों में सहेजा है, प्रेक्षण यह बतलाता है कि प्रकृति में पेड़-पौधे जीव-जंतु का आचरण क्या और कैसा है और किस से किस प्रकार का व्यवहार करना चाहिए .आत्मज्ञान हमें यह बताता है कि प्रत्येक जीव में परमात्मा का अंश वह आत्मा है जो हमारे ही समान दुख सुख का अनुभव करता है .अतः अक्षर ज्ञान, प्रेक्षण और आत्म ज्ञान को ही संपूर्ण ज्ञान की श्रेणी में रखा गया है.
ज्ञान एक है परंतु अध्ययन और लेखन की सुविधा के लिए उसे कई विषयों में विभाजित किया गया है. कई विषय वास्तव में सीढ़ी हैं जो ज्ञान रूपी शिखर तक पहुंचने में सहायता करते हैं.
ज्ञान और अनुभव में अंतर है. व्यक्ति जो कार्य निरंतर करता है उसे उस कार्य का अनुभव होता है .अनुभव को जब व्यक्ति अक्षर ज्ञान में पिरोकर आने वाली पीढ़ियों के लिए संचित करता है तभी ज्ञान की यात्रा का प्रारंभ होता है. पुनः आने वाली पीढ़ी अक्षर ज्ञान ,प्रेक्षण और आत्म ज्ञान की यात्रा तय करती है. संसार में ज्ञान की यात्रा का यही क्रम है जो कई मानव समाज और कई देशों के विकास की दिशा तय करता है.
निष्कर्ष यह है कि प्रत्येक अनुभवी व्यक्ति को ज्ञानी नहीं समझना चाहिए और यह भी आवश्यक नहीं कि प्रत्येक ज्ञानी व्यक्ति को प्रत्येक कार्य का अनुभव हो .अनुभव और ज्ञान को निश्चित रूप से अलग समझना चाहिए तभी ज्ञानी व्यक्ति और अनुभवी व्यक्ति की पहचान हो सकती है. ज्ञान और अनुभव भिन्न होते हुए भी परस्पर पूरक हैं --ठीक उसी प्रकार जैसे कैंची के दो सिरे. यदि एक सिरा ना हो तो इसका अर्थ यह नहीं कि उससे कोई कार्य नहीं हो सकता परंतु जब भी ज्ञान और अनुभव के दोनों सिरे मिलेंगे तभी वह एक कैंची की भांति कार्य कर सकते हैं. यदि आपने अक्षर ज्ञान प्रेक्षण और आत्म ज्ञान से स्वयं को सुदृढ़ कर ही लिया है तो भी आप बड़े बुजुर्गों से जाकर मिले ताकि उनके अनुभव बटोर सकें और इस अनुभव के द्वारा ही आपका ज्ञान संपूर्ण होता है. याद रखें, सच्चा ज्ञानी व्यक्ति वही है जो ज्ञान का अर्थ समझता है ,और ज्ञान का अर्थ यही है कि आप दूसरों के अनुभव से सीख लें ना कि स्वयं को अच्छी बुरी दशा से गुजारने के पश्चात गौरव या पश्चाताप के भ्रम में पड़कर यह जीवन गुजार दें. लंबी यात्रा और संगठनात्मक जीवन -----ज्ञान और अनुभव का सर्वश्रेष्ठ अवसर हैं.
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आलेख - संजीव गुप्ता 
सोशल साइट  का लिंक- 
परिचय- संजीव गुप्ता एक सजग चिंतक और लेखक हैं एवं केंद्रीय सरकार के एक कार्यालय  में कार्यरत हैं.

Thursday, 31 May 2018

युवा प्रतिभा-3 / कुन्दन आनंद की कविताएँ

दो कविताएँ  - कुन्दन आनन्द 



कविता-1


क्या करे हम भला आप ही बोलिए 
चुप न रहिए जी अपनी जुबाँ खोलिए 

आप ने कल कहा तू न चल भीड़ में 
आप ही आज क्यों भीड़ में हो लिए? 

उनको अपनो में भी जब न अपना मिला
बंद कमरों में ही खूब वो रो लिए

धर्म हमने निभाया है मजदूर सा 
पीठ पर जो पड़ा सबको हम ढ़ो लिए 

हमको काँटों ने पाला पिता की तरह 
मेरे काँटों को फूलों से मत तौलिए.


कविता-2

जिस दिन से श्मशान से होकर आया है 
समझ गया है दुनिया बस मोह-माया है 

वो मेरी भी और तेरी भी है अपनी
मौत के लिए कोई नहीं पराया है 

दाने  दाने की कीमत उससे पूछो
कई रात बस भूख को जिसने खाया है 

खुशनसीबों में लिखो तुम हमको भी 
हमने भी तो माता पिता को पाया है 

इस शहर में भी खुद में ज़िंदा हूूँ क्योंकि 
गाँव की मिट्टी ने मुझे बनाया है.
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कवि- कुन्दन आनन्द
कवि का ईमेल- anand22021994@gmail.com
कवि-परिचय:  कुन्दन आनन्द अत्यंत सक्रिय युवा साहित्यकर्मी हैं और पटना में आयोजित अधिकांश कवि-गोष्ठियों में इन्हें आमंत्रित किया जाता है और ये भाग भी लेते हैं. पेशे से शिक्षक कुन्दन बिलकुल सादगी को पसंद करते हैं विचारों और व्यवहार में भी. इनकी कविताओं में एक वैराग्य का भाव झलकता है और समाज के विरोधाभास पर भी इनकी पैनी नजर है. जीवन अगर एक नाटक है तो ये उसमें  मात्र अभिनेता बनने की बजाय एक द्रष्टा की भाँति उसे देखकर उसके प्रति एक दृष्टिकोण विकसित करने में अधिक रूचि रखते हैं. अपने संस्कार, त्याग की भावना और आस्था को लिए यह कवि देश में एक सकारत्मक विराट परिवर्तन की आकांक्षा रखता है. इसमें कोई संदेह नहीं कि भविष्य में ये एक यशस्वी प्राढ़ कवि बन पाएंगे. 







Monday, 28 May 2018

राष्ट्रीय कवि संगम बिहार पटना की तृतीय गोष्ठी सह कवि सम्मेलन का आयोजन 27.5.2018 को सम्पन्न

राष्ट्रीय कवि संगम पटना का तृतीय गोष्ठी- सह- कवि सम्मेलन



"राष्ट्रीय कवि संगम बिहार" पटना जिला इकाई के अंतर्गत तृतीय गोष्ठी सह कवि सम्मेलन का आयोजन दिनांक 27 मई 2018 दिन रविवार को शहर के 'वीर कुंवर सिंह आजादी पार्क' में संपन्न हुआ| गोष्ठी का आयोजन पटना जिला इकाई के संयोजक डॉ. रामनाथ शोधार्थी एवं उप संयोजक केशव कौशिक द्वारा किया गया| गोष्ठी में प्रदेश संयोजक अविनाश कुमार पांडे की उपस्थिति रही तथा शहर के और भी कई बड़े साहित्यकार थे| इनमें प्रमुख समीर परिमल, सिद्धेश्वर प्रसाद, सुनील कुमार  ,योगेंद्र उपाध्याय की उपस्थिति रही| गोष्ठी में कार्यकारिणी गठन संबंधित चर्चा हुई तथा जल्द पटना जिला इकाई का कार्यक्रम कराने का निर्णय लिया गया| कार्यक्रम में निम्नलिखित युवा साहित्यकार उपस्थित थे, अमित अकेला ,सनी शर्मा, गुंजन सिंह, सुमन सौरभ, मयंक मिश्रा, रितेश गौरव, मनीष कुमार,अक्स समस्तीपुरी, आनंद प्रवीण, कुश कुमार, विकास राज, रविंद्र सिंह त्यागी, कुंदन आनंद, शिवांशु सिंह और सुबोध सिन्हा |
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आलेख एवं चित्र- अविनाश पाण्डे

Thursday, 17 May 2018

युवा प्रतिभा-2 / नेहा नारायण सिंह की कविताएँ

अंत की गुहार
कवयित्री - नेहा नारायाण सिंह




जब खिलती हँसी  कराहती  है 
जब कोई कली कुचली जाती है 
तब नारी-धर्म युद्ध के लिए पुकारता है
जब बेशर्म जमाना राजनीति करता है
रोको न खुद को, रूको न तुम 
द्वापरयुग नहीं जो कृष्ण आयेंगे
अग्नि सी तू  बहुत जल चुकी 
इस आग में अब सबको जलाना है

तब लड़ाई लाज की थी 
आज लड़ाई भी लाज की है 
तब  द्रोपदी खून से नहाई थी 
जब  पांडव करूक्षेत्र में थे 
समय चक्र की वेदी चढ़ चुका है
अब चंडी बन कर काल को समझाना है 

कोई नहीं इस भारत देश में 
आधे जन मुर्दा बन बैठे हैं
इतने पात्र  जीते हैं हम 
एक पात्र अब और जीना है 
हाय-हाय कर बहुत देख लिया 
अब काली बन मुर्दो से श्रृंगार करना है
नजर उठे जो बुरी उन आँखों को नोच लेना है

छूती उन भुजाओं को उखाड़ फेंकना है
शूल देना है उस तन को जो तुझ पर भारी पड़े
आधे जन है हम 
शैतानों की बर्बादी का मंजर ला सकते है
कब तक बर्बाद होते देखते रहे
खुद को अपनों के दर्पण में देख रोते रहे
अति अंत की गुहार लगा रहा है 
आंदोलन एक अब हम करते हैं
क्रान्तिवीर बन अब युद्ध लड़ते है 
चण्डी काली का रूप अब हम धरते हैं

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वो रात कैसी थी ? 
कवयित्री - नेहा नारायाण सिंह

वो रात कैसी थी ?  वो रात कैसी थी ?
जब रात के नौ बजे थे, सड़क  सूनी पड़ी थी
दूर से,  अनजाने शोर की खामोशी
बड़ी तेजी से,  उसकी तरफ़ बढ़ी आ रही थी
जब रात के नौ बजे थे, सड़क सूनी पड़ी थी 

उसकी कहानी ने इनसानियत को शर्मिंदा कर दिया
 हर दिल को रुला दिया बेतहाशा  इस सर्दी में
सड़क पर जाने के लिए हमे मजबूर कर दिया
कहा - अब और नहीं
आँखो पर पड़ी पट्टी को हटाओ
कानो के पर्दे खोल जाओ

जाओ मेरी चीखें तुम्हें सोने नहीं देंगी
मेरी कहानी तुम्हें  चुप होने नहीं देगीं
मेरी मैयत पर अब दीये मत जलाओ
जाओ जाओ मुझे इन्साफ़ दिलाओ
वो रात जैसी  भी थी वो रात फिर ना आए
फिर कोइ निर्भया भय की कहानी न लिख जाए 

वो रात कैसी थी?  वो रात कैसी थी?
मेरे दर्द पर  आसमाँ रो गया
मेरी  आह से धरती फट गई
हिन्द पर लगी कालिख की रात थी  वो 
क़यामत की रात थी वो 
मेरे दर्द की रात थी वो 
तेरे शर्म की रात थी वो 
वो रात  एेसी  थी, वो रात  एेसी  थी.
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कवयित्री- नेहा नारायण सिंह
ईमेल- nehasrlnmi2017@gmail.com
कवि परिचय- नेहा नारायण सिंह एक युवा किन्तु अत्यंत सक्रिय कवयित्री हैं और लेख्य मंजुषा सहित अनेक साहित्यिक संस्थाओं से जुड़ी हैं. इन्होंने एल.एन.मिश्रा इंस्टीच्यूट, पटना से एम.सी.ए. की पढ़ाई पूरी की है और एक निजी कम्पनी में कार्यरत हैं.


Thursday, 19 April 2018

राष्ट्रीय कवि संगम का राष्ट्रीय अधिवेशन वृन्दावन में 21 से 22 अप्रैल 2018 को

राष्ट्रीय कवि संगम के बिहार प्रांत के संयोजक अविनाश पाण्डेय ने बताया कि युवाओं में साहित्यिक अलख जगानेवाली इस साहित्यिक संस्था का राष्ट्रीय सम्मेलन वृन्दावन में 21 और 22 अप्रैल 2018 को होने जा रहा है.



राष्ट्रीय अधिवेशन वृन्दावन में  20/04/2018  को  पहुंचने बाले  कवियों की सूची:-

१.  अविनाश कुमार पाण्डेय
२.   कुमार आर्यन
३.  सागर आनंद
४.  संजीव कुमार मुकेश
५.  विनोद कुमार 'हसौड़ा'
६.  नीरज कुमार सिन्हा
७.  डॉ राजकुमार भारती
८.  गौरीशंकर शाह
९.    अंजु दास
१०.  राहुल कुमार
११.  हरिन्द्र सिन्हा
१२. स्वराक्षी स्वरा
१३. रामनाथ शोधार्थी
१४.मिथुन चक्रवर्ती
१५. नवनीत कृष्णा
१६. मनीष कुमार रंजन
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राष्ट्रीय अधिवेशन वृन्दावन में काव्य पाठ करने बाले कवियों की सूची:--
१.    सागर आनंद
२. विनोद कुमार'हसौड़ा'
३. कुमार आर्यन
४.संजीव कुमार मुकेश 
५.डाॅ.राज कुमार भारती
६.अंजु दास
७.अविनाश कुमार पाण्डेय
८. राहुल कुमार
९.नीरज कुमार सिन्हा